UP TGT Syllabus

UP TGT Syllabus:- Having a solid understanding of the selection process helps in honing your strengths and identifying your weaknesses before any competitive exam. Similarly, for the UP TGT exam 2021, candidates should have some insight into the syllabus of UP TGT 2021, which is given in a table as well as a PDF below. The Commission conducts the written exam for the selection of the candidates for personal interview.

UP TGT Syllabus

In this section, the candidates can check the detailed syllabus for the UP TGT 2021 recruitment exam.

We suggest to the candidates have to stick to the topics mentioned in the syllabus for preparation. All the questions asked in the exam are based on the topics that are given in the UP TGT official syllabus.

UP TGT Syllabus Hindi / हिन्दी

No.-1. हिन्दी साहित्य का इतिहास– आदिकाल, भक्तिकाल, (संत काव्य, सूफी काव्य, रामकाव्य, कृष्ण काव्य) रीतिकाल, आधुनिक काल, भारतेन्दु युग, द्विवेदी युग, छायावाद, प्रगतिवाद, प्रयोगवाद, नयी कबिता।

No.-2. हिन्दी गद्य साहित्य का विकास– निबन्ध, नाटक उपन्यास, कहानी, हिन्दी गद्य की लघु विधाएं-जीवनी, आत्मकथा, सस्मरण रेखा चित्र, यात्रा-साहित्य, गद्यकाव्य व्यग्य।

No.-3. हिन्दी के रचनाकार एवं उनकी रचनाएँ

No.-4. काव्य के भेद रस-अवयव भेद, छन्‍्द, अलंकार, शब्दालंकार, अर्थालंकार, काव्यगुण, काव्य दोष। हिन्दी की बोलियाँ, विभाषाएं, हिन्दी की शब्द सम्पदा, हिन्दी की ध्वनियाँ देवनागरी लिपि नामाकरण, विकास विशेषताएं, त्रुटियाँ सुधार के प्रयत्न।

No.-5. व्याकरण- लिंग वचन, कारक, सन्धि, समास, वर्तनी, वाक्य, शुद्धिकरण, शब्द रूप-पर्यायवाची, विलोम, श्रुति समभिन्नार्थक शब्द, वाक्यांश के लिए एक शब्द, मुहावरा, लोकोक्ति।

No.-6. संस्कृत साहित्य

(क) संस्कृत के प्रमुख रचनाकार एवं उनकी रचनाएं, कालिदास, भवभूति, भारवि, माघ, दण्डी,

श्रीहर्ष |

(ख) सन्धि-स्वर एवं व्यंजन सन्धि, समास, शब्द रूप, धातु रूप कारक प्रयोग।

(ग) अनुवाद

UP TGT Syllabus English

Section 1-Language

Unseen Passage for Comprehension. Part of speech, Spelling, Punctution, Vocabulary, Tense, Narration, Prepostion Usage, Transformation and Agreement.

Section 2-Literature

Forms of literature Authors and their work-Shakespeare, John Miltion, William Wordswarh and John Glaswarthy.

UP TGT Syllabus Math / गणित

No.-1. वाणिज्य / गणित-काम समय और चाल समय, चक्रवृद्धि ब्याज, बैकिंग, कराधान, प्रारम्भिक नियमों का प्रवाह सचित्र |

No.-2. सांख्यिकी- बारंबारता बटन, सांख्यिकी आकड़ों का आलेखीय निरूपण, केन्द्रीय प्रवृत्ति की मापे, विक्षेपण की मापे, जन्म / मृत्यु सांख्यिकी, सूचकांक ।

No.-3. बीजगणित- करणी, बहुपद और उनके गुणनखण्ड, लघुगणक, दो अज्ञात राशियों के रेखिय समीकरण, बहुपदों के महत्तम समापर्वतक और लघुत्तम समापवर्त्य एक घातीय तीन अज्ञात राशियों के युगपत्त समीकरण, द्विघात बहुपद के गुणनखण्ड, द्विघात समीकरण, अनुपात व समानुपात, संख्या पद्धति समुच्चय संक्रियायें, प्रतिचित्रण।

No.-4. सारणिक- परिभाषा, उपसारणिक एवं सहखण्ड, 3/3 क्रम तक के नागरिक का विस्तार सारणिक के सामान्य गुण क्रैयमर के नियम की सहायता से।

No.-5. रैखिक समीकरणों के निकाय का हल, आब्यूह के प्रकार, 343 क्रम तक के आव्यूहों का योग का गुणनफल , परिरवतन आव्यूह सममित और विषम सममित आब्यूह, का प्रतिलोम आब्यूह की सहायता से तीन अज्ञात राशियों के युगपत समीकरण का हल, समीकरण सिद्धान्त, मूलों के सममित फलन, अंकगणितीय, गुणोत्तर, हरात्मक, श्रेणियां, तथा प्राकृतिक संख्याओं के वर्गों और घनों के पदों से बनी श्रेणी का योग।

No.-6. क्रमचय और संचय, द्विपद प्रमेय, चरघातांकी और लघुगणकीय श्रेणी का योग।

No.-7. प्रायिकता-योग तथा गुणन के सिद्धान्त।

No.-8. समुच्चय सिद्धान्त-समुन्च बीजगणित के नियम, तुल्यता, संबंध, प्रतिचित्रण, प्रतिचित्रणों का संयोजन प्रतिलोम प्रतिचित्रण, पियानों के अभियृहीत तथा आगमन अभिगृहित के प्रयोग। आंशिक समूह और समूह समाकारिता, उपसमुच्चय द्वारा जनित उपसमूह, चक्रीय समूह, किसी अपयव की कोटि, चक्रीय समूह के उपसमूह, सहसमुच्चय वियोजन, लैंगरान्ज प्रमेय।

No.-9. वास्तविक विश्लेषण-वास्तविक संख्याओं की अभिगृहीतियाँ, समुच्चयों की गणनीयता दूरी समष्टि, सामीप्य, विवृत समुच्चय, संवृत समुच्चय, ब्युत्पन्न समुच्चच सघन समुच्चय परिपूर्ण समुच्चय बोल्जैनों-विस्ट्रास प्रमेय सहित अन्य सामान्य प्रमेय।

No.-10. वास्तविक संख्याओं के अनुक्रम-अनुक्रम की सीमा, अधिकारी अनुक्रम, अपसारी, अनुक्रम परिबद्ध अनुक्रम, एकदिष्ट अनुक्रम, अभिसारी अनुक्रमों की संकियायें, कोशी अनुक्रम, सीमा संबंधी कोशी प्रमेय और वास्तविक अनुक्रम की अभिसरिता पर कोशी सिद्वान्त।

No.-11. सीमा व सातत्य वास्तविक मान वाले फलनों की सीमा, वाम पक्ष और दक्षिण पक्ष सीमा, फलन का सातत्य, संतत फलनों की विशेषताएं, असातत्य और इसके प्रकार।

No.-12. त्रिकोणमिती-वृत्तीय माप तथा विशिष्ट कोणों के त्रिकोणीमितीय अनुपात, दो कोणों के योग और अन्तर के तथा किसी कोण के अपवर्त्य एवं अपवर्तक कोणों के त्रिकोणमितीय अनुपात,

No.-13. त्रिकोणमितीय सर्वतमिकायें, त्रिकोणमितीय समीकरण, त्रिभुज का हल, परिगम अन्त एवं वाहय वृत्तों की त्रिज्यायें एवं गुण, प्रतिलोम वृत्तीय फलनों के सामान्य गुण।

No.-14. सम्भिश्र संख्यायें-उनके योग तथा गुणनफल, डिमाइवर प्रमेय और इसका प्रयोग उचाँई और दूरी। सम्मिश्र राशियों के चरघातांकीय फलन, वृत्तीय फलन एवं हाइपर।

No.-15. बोलिक फलन-वास्तविक व अधिकल्पित भागों में पृथक्करण।

No.-16. ज्यामिती-बोधायन पाइथागोरस सिद्वान्त व इसका विस्तार, वृत्त व वृत्तखण्ड, वृत्त के चाप व जीवा वृत्त की स्पर्श रेखा, एकांतर वृत्त खण्ड और उसके कोण, जीवा के खण्ड और उनसे निर्मित आयत, रेखीय सममतल आकृतियों की समरूपता।

No.-17. निर्देशांक ज्यामिती-कातीय तल, रेखा, द्वितीय घात के व्यापक समघातीय समीकरण, द्वारा निरूपित सरल रेखा युग्म। इनके बीच का कोण व अर्धकों के युग्म का समीकरण, समकोणीय कातीर्य निर्देशांकों में शंकव (वृत्त, परवलय, दीर्घ वृत्त व अति परवलय) के मानक समीकरण व प्राचलिक समीकरण, द्विघात व्यापक समीकरण द्वारा रेखा युग्म, वृत्त, परवलय दीर्घवृत्त व अति परवलय निरूपति करने के प्रतिबन्ध, मूल बिन्दु व अक्षों के स्थानान्तरण की सहायता से वृत्त, परवलय, दीर्घवृत्त व अतिपरवलय के समीकरण प्राप्त करना, शांकव के किसी बिन्दु पर स्पर्शी व अभिलम्ब-छेदक रेखा का शांकव से प्रतिच्छेदन, सीमान्त स्थिति, में इसके स्पर्शी होने का प्रतिबन्ध, स्पर्शियों के प्राचलिक समीकरण, वाह्गा बिन्दु से शांकव पर स्पर्शी युग्म।

No.-18. शांकव के किसी बिन्दु पर अभिलम्ब का समीकरण–स्पर्श करने अथवा अविलम्ब होने का प्रतिबन्ध, ध्रुवीय निर्देशाकों (द्विविगीय) में शांकव का मानक समीकरण, गोला, शंकु व बेलन का त्रिविमीय ज्यामिती।

No.-19. कलन-अवकलन-अवकलन की परिभाषा, बीजीय, त्रिकोणमितीय, चरघातांकी तथा लघुगणकीय फलनों का अवकलन, स्पर्शरेखा व अभिलम्ब, एक चर राशि के फलन के उच्चिष्ठ व निम्निष्ठ सरल वक्रों का अनुरेखण।

No.-20. समाकलन-खण्डश: तथा प्रतिस्थापन से समाकलन, आंशिक भिन्‍नों की सहायता से समाकलन, निश्चित समाकलन व इसके प्रयोग समतलीय वक्रों के अन्तर्गत क्षेत्रफल, बेलन, शंकुव गोले के अवकलन व पृष्ठ ज्ञात करने में समीकरण अवकलन समीकरण की कोटि व घात। गुरूत्वाधीन सरल रेखीय सरल गति के समीकरणों को हल करना

No.-21. सदिश विश्लेषण-क्रमिक युग्म व क्रमिक त्रिक के रूप में स्थित संदिश, विस्थापन सदिश मुक्त सदिश, इकाई सदिश, मापांक तथा दिक्‍्कोजया, बराबर सदिश, सदिशों के योग (बल, वेग, त्वरण) का संयोजन। दो सदिशों का अन्तर-सापेक्ष वेग, दो सदिशों का अदिश व सदिश गुणन। कार्य की गणना, बल आघूर्ण व टार्क की गणना में इनका प्रयोग। सदिशों का त्रिगुणन।

No.-22. स्थिति विज्ञान-तीन बल लगे पिण्डों का संतुलन, लामी का प्रमेय, त्रिभुज का नियम त्रिकोणमितीय प्रमेय एवं दो समकोणीय बलों में नियोजन। संतुलन के सामान्य प्रतिबन्ध गुरूत्व केन्द्र |

No.-23. गति विज्ञान-गुरूत्व के अधीन उध्वधिर सममतल में गति प्रक्षेप्प की गति, कार्य, उर्जा, सामर्थ्य एम0के0एस0 प्रणाली में गणना।

UP TGT Syllabus Science/विज्ञान

भौतिकी

No.-1. विमा एवं मापन-एस0आई0पद्धति में मूल मात्रक व्युत्पन्न मात्रक, इकाईयों का एक पद्धति से दूरी पद्धति में परिवर्तन, विमीय विधि से समीकरणों का सत्यापन, अदिश एवं सदिश राशियाँ।

No.-2. गति एवं बल-सापेक्षिक गति, न्‍्यूटन का सपेक्षिक गति का सिद्धान्त विस्थापन, चाल एवं वेग, रेखीय गति, कोणीय गति और उनका संबंध, सरल रेखीय गति सतत्‌ एवं विभिन्‍न गतियाँ, जागत्व का सिद्धान्त, बल त्वरण, गति के समीरण, स्थितिज एवं गतिज उर्जा रेखी संवेग एवं कोणीय संवेग, उर्जा एवं संवेग का संरक्षण, स्थितिज एवं गतिज उर्जा का एक दूसरे में परिर्वतन, गुरूत्वीय एवं जड़त्वीय द्रव्यमान।

No.-3. न्यूटन के गति के नियम, क्रिया एवं प्रतिक्रिया, घूर्णन गति, बलयुग्म, क्षद्मबल, अपकेन्द्रिय एवं अभिकेन्द्रिययल, कोरियलिस बल न्यूटन गुरूत्व का नियम, केपलर का नियम, प्रक्षेप्प की गति, उपग्रहीय गति भूस्थिर उपग्रह, पलायन बेग, गुरूत्वीय त्वरण, ऊँचाई, गहराई, भूसतह एवं भूगति के अनुसार “जी” में परिवर्तन सरल आवर्त गति और उनका लाक्षणिक गुण, सरल लोलक, संरक्षित एवं असंरक्षित बल, प्रयानयनबल, आवर्तकाल को प्रभावित करने वाले कारक, त्वरण एवं बिना त्वरण वाले फेम (लिफ्ट) भारहीनता की अवस्था।

No.-4. उष्मा-उष्मा एवं तापमान की संकल्पना, एक पैमाने से दूसरे पैमाने में तापरूपान्तरण का मापन, तापमान का परम माप, तापीय साम्य, ठोसो में प्रसार, रेखिक, बाहय एवं घनाकार एवं सरल रेखी बहाव से उनके संबंध, आक्सोद्राविक ठोस, उष्मा चाल, साम्य अवस्था ताप प्रवणता, अच्छे एवं बुरे चालक, उष्मा का संबहन, संबहन धारा, मायासी, एवं वास्तविक प्रसार, उष्मा का विकिरण, उत्सर्जकता, अवशोषकता।

No.-5. किरचाफ के नियम, कृष्ठीका, बीन्‍्स का विस्थापन का नियम, किसी कृष्णिका से विकिरण का प्लांक का नियम, विद्युत चुम्बकीय तरंगों के रूप में विकिरण, दाव एवं उर्जा घनन्त्व न्यूटन का शीतलन का नियम विकिरण संशोधन, स्टीफन का नियम, ताप सामर्थ्य, ऊष्मा का जल तुल्यांक।

No.-6. ठोसो द्रवों एवं गैसों के विशिष्ट उष्मा, मेयर का सम्बन्ध एक परमाणुक, द्विपरमाणुक एवं त्रिपरमाणुक गैसों के लिए विशिष्ट उष्मा का अनुपात उष्मा का मापन, कैलोरीमीटर, अवस्था में परिवर्तन, आईना, हाइग्रोमीटर उष्मा का यांत्रिक तुल्यांक, उष्मागतिकी का प्रथम नियम।

No.-7. प्रकाश-गोलीय दर्पण एवं लेन्स, अपवर्तनाक, प्रतिबिम्ब का बनना, मानव की आँख, विपणन, अवर्णता, दूर एवं निकट दृष्टिदोष, स्पष्ट दृश्यता की न्यूनतम्‌ दूरी, व्यतिकरण विवर्तन तथा धुवीकरण की मूल अवधारणाये।

No.-8. विद्युत-सेल, प्राथमिक एवं द्वितीयक सेल, आंतरिक प्रतिरोध विद्युत वाहक बल इलेक्ट्रानिक एवं चालन धारायें, अनुगमन बेग, माध्ययुक्त पथ, विश्राम काल, ओम का नियम, श्रेणीक्रम एवं समान्तर क्रम में प्रतिरोध, धारा एवं विभवान्तर का मापन, गैल्वेनोमीटर का अमीटर एवं बोल्टमीटर में परिवर्तन, प्रतिरोध का मापन, व्हीट स्टोन सेतु पोस्ट आफिस बाक्स मीटर सेतु, ए0सी0 एवं डी0सी0 धाराओं में भेद, ट्रान्सफार्मर, चोक मीटर एवं जनरेटर।

No.-9. आधुनिक भौतिकी-परमाणु की संरचना, परमाणु का वेक्टर माडल, बोर का हाइड्रोजन परमाणु सिद्धान्त, परमाणु उर्जा की मूल संकल्पना, सलयन, विखण्डन, किरणों का निर्माण, प्रकाश वैद्युत प्रभाव, पी0एन0 संधि, प्र्वंधक की मूल संकल्पना।

रसायन विज्ञान

No.-1. द्रव्य-प्रकृति एवं व्यवहार द्रव्य के प्रकार, तत्व एवं उनका वर्गीकरण (धातु एवं अधातु) यौगिक एवं उनके मिश्रण।

No.-2. रासायनिक संयोग के नियम-स्थिर, अपवर्त्य एवं व्युत्करम अनुपात का नियम, गैलुसक का गैसीय आयतन संबंधी नियम, मिशरलिक का समाकृतित्व का नियम।

No.-3. पदार्थ की संरचना-डाल्टन का परमाणु सिद्धान्त, परमाणु, अणु एवं उनके अभिलक्षण। परमाणु संरचना-इलेक्ट्रान प्रोटान तथा न्यूट्रागन की खोज। रदरफोर्ड का अल्फा किरण प्रकीर्णन प्रयोग तथा नाभिक की खोज।

No.-4. रदरफोर्ड, बोहर एवं समरफील्ड के परमाणु मॉडल। क्वाटम संख्याएं, आधुनिक परमाणु सिद्धान्त |

No.-5. डीब्राग्ली समीरण, हाईजेनन वर्ग-अनिश्चतता सिद्धान्त एस0पी0 तथा डी0 कक्षकों की आकृति आफवाउ सिद्धान्त, हुण्ड के नियम एवं पाउली के अपवर्जन सिद्धान्त के आधार पर तत्वों का इलेक्ट्रानिक विन्यास |

No.-6. रेडियों सक्रियता-रेडियों सक्रियता की खोज, रेडियों सक्रिय किरणें एवं उनके गुण, अर्द्धभायु काल एवं औसत आयु, रेडियों सक्रिय क्षय के नियम, नाभिकीय विखण्डन एवं सलयन, कृत्रिम रेडियों सक्रियता। समस्थानिक, सम्भारी एवं समन्यट्रानिक।

No.-7. रसायनिक आबंधन-संयोजकता की मूल अवधारणा, इलेक्ट्रानिक सिद्वान्त, अष्टक नियम, अष्टक नियम के अपवाद, वैधुतसंयोजी, सहसंयोजी एवं उप सहसंयोजी आबंध। आयनिक सहसंयोजी एवं उप सहसंयोजी यौगिक के अभिलक्षण। ध्रुवण एवं फजान नियम। अक्रिय युग्म प्रभाव सह संयोजकता का संयोजकता आबंध सिद्धान्त (हाइड्रोजन अणु के लिए) संकरण तथा एस.पीएस.ी. 2 एवं एस. पी. 3 संकर कक्षकों की आकृति।

No.-8. रासायनिक अभिक्रियायें-संकेत / प्रतीक आयन एवं सूत्र। रासायनिक अभिक्रियाओं की रासायनिक समीकरणों द्वारा प्रस्तुति। भौतिक एवं रासायनिक परिरवतन एवं उनमें अंतर। रासायनिक अभिक्रियाओं के प्रकार-विस्थापन, योगात्मक, वियोजन, अपघटन, ट्विअपघटन, मंद तीव्र, उष्माक्षेपी, उल्फाशोषी एवं उत्प्रेरित अभिक्रियायें। वैद्युत रासायनिक सेल-वोल्टाइक सेल एवं इसके कार्य की क्रिया विधि।

No.-9. शुष्क सेल, लेड भंडारण बैट्री, उत्क्रणणीय सेल, इलेक्ट्रोड विभव, नर्न्स्ट समीकरण एवं इसके अनुप्रयोग। तत्वों का आवर्त वर्गीकरण-मेन्डलीफ का आवर्ती वर्गीकरण एवं इसका आधार, मंडलीफ आवर्त सारिणी के गुण एवं दोष, आवर्त सारिणी का परिवर्तित रूप एवं इसके महत्वपूर्ण लक्षण, तत्वों के आवर्ती गुण (परमाणु एवं आयनिक त्रिज्याएँ आयनन विभव, इलेक्ट्रान बंधुता तथा विधुत ऋणात्मक) वर्गों एवं आवर्तों में आवर्तन गुणों का परिरवतन।

No.-10. एस. तथा पी. ब्लाक तत्वों के सामान्य गुण। प्रथम पंक्ति के संक्रमण तत्वों (3 डी0 ब्लाक के तत्वों) के गुणों की उनके इलेक्ट्रानिक्स विन्यास, आक्सीकरण अवस्था, रंग चुम्बकीय गुण एवं जटिल यौगिकों के निर्माण के संदर्भ में विवेचना।

No.-11. सामान्य कार्बनिक रसायन- प्रेरणिक, इलेक्ट्रोरिक तथा मेसोमेरिक प्रभाव। अतिसंयुग्मन, अनुनाद, एवं उनके अनुप्रयोग, इलेक्ट्रान स्नेही एवं नाभिक स्नेही अभिकर्मक, मुक्तमूलक, कार्बोकेटायन एवं कोबोएनायन। हाईडोजन आबंधन एवं इसके प्रभाव। कार्बनिक यौगिक का वर्गीकरण एवं उनको नामकरण।

No.-12. समावयता-संरचनात्मक एवं त्रिविम समावयता, कार्बनिक अभिक्रियाओं की क्रियाविधि की अवधारण | सरल प्रतिस्थापना, योगात्मक एवं निराकरण अभिक्रियाओं की क्रियाविधि। निम्न कार्बनिक यौगिकों के बनाने की विधियाँ एवं उनके गुण- एल्केन, एल्कीन, एल्काइन, एलिकलहैलाइड, कीटेन, एसिड एवं उनके व्युत्पन्न बेन्जीन, इसका निर्माण, गुण एवं संरचना।

UP TGT Syllabus Social Science/सामाजिक विज्ञान

(अ) भूगोल

No.-1. भौतिक भूगोल-सौर मण्डल-उत्पत्ति सौर मण्डल में पृथ्वी की आकृति एवं गतियां, पृथ्वी की गतियों के प्रभाव, सूर्य ग्रहण एवं चन्द्रग्रहण, अक्षांश देशान्तर का निरूपण, ग्लोब पर किसी स्थल की अवस्थिति का निर्धारण, स्थानीय एवं प्रामाणिक समय का निर्धारण, अन्तर्राष्ट्रीय तिथि रेखा-अनुरेखन एवं महत्व।

No.-2. स्थलमण्डल-चट्टान, उत्पत्ति एवं प्रकार, ज्वालामुखी क्रिया /ज्वालामुखी के प्रकार एवं विश्व वितरण, भूकंप उत्पत्तियां एवं विश्व वितरण, महादीपों एवं महासागरों का वितरण, पर्वत एवं उनके प्रकार, वलित पर्वतों का विश्व के प्रमुख पठार एवं उनके प्रकार, मैदान एवं नदी घाटिया, अपरदन एवं अपक्षय प्रक्रियायें, डेविस का अपरदन चक्र, नदी घाटी की निम्नीकरण प्रक्रिया, जल अपरदन द्वारा विभिन्‍न चरणों में निर्मित प्रमुख भू आकृतियाँ, समोच्य रेखायें एवं समोच्य रेखाओं द्वारा प्रमुख स्थल आकृतियों की पहचान।

No.-3. वायु मण्डल-वायुमण्डल की संरचना, सूर्यताप एवं उसे प्रभावित करने वाले कारक, तापमान का क्षैतिज एवं उर्ध्वाकार वितरण, तापमान विलोमता, वायुदाव पेटियां एवं सनातन पवन, महत्वपूर्ण स्थानीय पवन, वर्षण की प्रक्रिया-वर्षा, पाला कुहरा आदि

संवाहनिक, धरातलीय एवं चक्रवातीय वर्षा, विश्व के जलवायु प्रदेश, दैनिक मौसम मानचित्र में प्रयुक्त संकेतों की पहचान।

No.-4. जल मण्डल-महासागरों का उच्चावचन, महासागरीय तापमान एवं लवणता, महासागरीय धारायें उत्पत्ति प्रवाह दिशा एवं जलवायुविक प्रभाव, ज्वार भाटा प्रक्रियायें एवं उत्पत्ति के सिद्वान्त।

No.-5. जैव मण्डल-संरचना, वनस्पति के प्रकार एवं विश्व वितरण तथा संबंधित वन्य जन्तु भाग।

No.-6. मानव भूगोल-मानव पर्यावरण अर्न्तसंबंध, सैद्वान्तिक, विवेचन रेटजेल, डेविस, सेम्पुल, हंटिग्टन, वाइडल डी ला ब्लाश ब्रुस एवं ग्रिफिश टेलर के मत, विश्व में जनसंख्या वृद्धि एवं वितरण का विवेचन, मानव प्रजातियाँ, विश्व की प्रमुख मानव प्रजातियाँ काकेशियस, मंगोलाइड के लक्षणात्मक भेद एवं वितरण, विश्व की आदिम जातियां एवं तत्संबंधित निवास से अर्न्तसंबंध, बशुमैन एस्कीमों, खिरजीज, मसाई, सेमांग के विशेष संदर्भ में।

No.-7. मानव अधिवास-प्रमुख प्राकृतिक प्रदेशों में ग्रामीण अधिवास के स्वरूप एवं पर्यावरण से संबंध , विश्व के प्रमुख विराट नगर अवस्थिति एवं महत्व।

No.-8. आर्थिक भूगोल-विश्व की प्रमुख फसलों का भौगोलिक विवेचन चावल, गेहूं कपास, गन्ना, चुकन्दर, चाय, कहवा एवं रबर, विश्व में मत्स्य आहरण, वनदोहन एवं दुग्ध उत्पादन, प्रमुख ऊर्जा एवं खनिज संसाधन-कोयला, पेट्रोलियम, लौह अयस्क मैगनीज बाक्साइट, एवं ताबा विश्व में प्रमुख उद्योगों की अवस्थिति के कारक एवं वितरण लौह इस्पात, सूती एवं कृत्रिम वस्त्र, कागज, तेल, शोधन प्रमुख औद्योगिक प्रदेश, उत्तरी पूर्वी सयुंक्त राज्य किंकी, रूर यूक्रेन, कैण्टन, संघाई येगयांग, ब्राजील पठार केपटाउन-नेटाल, विश्व के प्रमुख व्यापारिक मार्ग एवं पत्तन।

No.-9. भारत स्थिति- विस्तार, अर्न्तराष्ट्रीय सीमायें एवं इससे संबंधित भू-समस्यायें, हिन्द महासागर एवं उसका आर्थिक एवं सामरिक महत्व धरातलीय, स्वरूप, जलप्रवाह, मानसून की उत्पत्ति एवं विशेषताएं, जलवायु प्रदेश मिदट्टियां एवं उनका जलवायु एवं प्राकृतिक वनस्पति से अन्तर्सम्बंध निर्ववीकरण, बाढ़ एवं मिट्टी अपरदन की समस्‍यायें एवं उनके समाधान। कृषि-खाद्यानन उत्पादन, प्रगति एवं समस्‍यायें हरित, श्वेत एवं नीलकातियां।

No.-10. प्रमुख फसले चावल, गेहूँ, गन्ना, दलहन, तिलहन, चाय के भौगोलिक वितरण एवं उत्पादन प्रवृत्ति खनिज संसाधन एवं उनके दोहन से जुड़ी समस्‍यायें उर्जा संकट एवं उसका समाधान कोयला एवं खनिज तेल का भौगोलिक विराट एवं उत्पादन।

No.-11. उर्जा के वैकल्पिक स्रोत, बहुउद्देशीय योजनायें एवं उनसे जुडी पर्यावरणीय समस्‍यायें वस्तु निर्माण उद्योग, लौह, इस्पात, वस्त्र, चीनी, कागज, सीमेंट एवं अल्युमिनियम उद्योगों की अवस्थिति एवं वितरण प्रतिरूप, जनसंख्या वृद्धि एवं विवरण, जनसंख्या जनित समस्या परिवहनों के साधन विदेशी व्यापार, प्रमुख नगर एवं बन्दरगाह।

(ब) इतिहास

No.-1. पूरा ऐतिहासिक संस्कृतियां पूर्व पाषाण युग, मध्य पाषाण युग, नव पाषाण युग, इनकी प्रमुख विशेषताएं, प्राचीन युग-सिन्धु घाटी, सभ्यता प्रमुख विशेषताएं, वैदिक काल, पूर्व वैदिक काल, उत्तर वैदिक काल, राजनीतिक, सामाजिक, धार्मिक एवं आर्थिक जीवन, धार्मिक आन्दोलन जैन धर्म बौद्ध धर्म, भागवत धर्म, और शैव धर्म, मौर्यकाल राजीनति इतिहास, समाज एवं संस्कृति, गुप्त राजवंश राजनीति इतिहास और समाज एवं संस्कृति, चोल वंश प्रशासन।

No.-2. भारत में इस्लाम का आगमन एवं प्रभाव आक्रमण एवं प्रभाव, दिल्‍ली सल्तनत की स्थापना-कुतुबुद्दीन ऐबक का योगदान, इल्तुत्मिश का मूल्यांकन, बलवन का जीवन चरित्र और उपलब्धियां अलाउद्दीन खिलजी की उपलब्धियां, तुगलक वंश-गयासुद्दीन तुगलक, मोहम्मद बिन तुगलक, फिरोजशाह तुगलक, तैमूर का आक्रमण बहमनी साम्राज्य, सैय्यद एवं लोदी वंश, मुगल वंश बाबर, हुमायूँ अकबर, जहांगीर, शाहजहॉँ और औरगंजेब।

No.-3. छत्रपति शिवाजी जीवन चरित्र एवं उपलब्धियां आधुनिक भारत (858-4950 ई0) सन्‌ 4857 ई0 में प्रथम स्वतन्त्रता संग्राम का कारण, स्वरूप एवं परिणाम, उन्‍नीसवीं शताब्दी में भारतीय पुर्नजागरण तथा सामाजिक धार्मिक आन्दोलन, राष्ट्रीय आन्दोलन में महात्मा गाँधी का योगदान, स्वतन्त्रता की प्राप्ति तथा विभाजन के बाद का भारत (सन्‌ 4950 ई तक)

(स) अर्थशास्त्र

No.-1. आर्थिक सिद्धान्त-अर्थशास्त्र, परिभाषा एवं प्रकृति, स्थेतिक एवं प्रवैगिक, विश्लेषण, अणु एवं व्यापक, विश्लेषण मांग का नियम एवं मांग के लोच की माप, उपयोगिता विश्लेषण, तटस्थ वक्र द्वारा उपभोक्ता का संतुलन, आय प्रभाव, कीमत प्रभाव, प्रतिस्थापना प्रभाव प्रगटित अधिमान।

No.-2. परिवर्तन शील अनुपातों का नियम एवं पैमाने का प्रतिफल नियम, उत्पादन फलनकार, समोत्पाद वक्र विश्लेषण माल्थस एवं अनुकूलतम जनसंख्या सिद्धान्त। कीमत निर्धारण के सिद्धान्त– परंपरावादी एवं आधुनिक पूर्ण स्पर्धा एकाधिकार एवं एकघिकृत प्रतियोगिता में फर्म का साम्य।

No.-3. वितरण का केन्द्रीय सिद्धान्त-रिकार्डो का आधुनिक लगान सिद्धान्त, ब्याज का नवपरम्परावादी एवं कीन्स का सिद्धान्त, प्रोणनाइट का लाभ सिद्धान्त, पूर्ण एवं अपूर्ण प्रतियोगिता में मजदूरी निर्धारण।

No.-4. मुद्रा एवं अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार-मुद्रा की मॉंग एवं मुद्रा की पूर्ति, मुद्रा का मूल्य, फिशर तथा कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय समीकरण, मुद्रास्फीति, संस्फीति एवं मंद्रीस्फीति वर्तमान भारतीय मौद्रिक प्रणाली, व्यापारिक बैंकों की आधुनिक प्रवृत्तियों, साखा निर्माण, केन्द्रीय बेंक के कार्य, साख नियन्त्रण के परिमाणात्मक एवं गुणांत्मक तरीके, अल्पविकसित अर्थ व्यवस्था में मौद्रिक नीति।

No.-5. अन्तर्राष्ट्रीय एवं अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार-तुलनात्मक लागत सिद्धान्त, स्वतन्त्र व्यापार एवं संरक्षण की विधियाँ व्यापार की शर्तें। विनिमय दर, क्रयशील समता सिद्धान्त एवं भुगतान संतुलन सिद्धान्त, व्यापारशेष एवं भुगतानशेष, असंतुलन के कारण एवं समाधान। अन्तर्राष्ट्रीय मुद्राकोष, अन्तर्राष्ट्रीय पुननिर्माण एवं विकास बैंक, एशियन विकास बैंक विश्व व्यापार संगठन।

No.-6. राजस्व एवं रोजगार सिद्धान्त निजी एवं सार्वजनिक वित्त, अधिकतम सामाजिक कल्याण सिद्धान्त ऐच्छिक, विनिमय सिद्धान्त कर एवं आर्थिक प्रभाव के सिद्धान्त, कर एवं शुल्क, विशेष निर्धारण, कर देय क्षमता, करों में न्याय, कराघात एवं करापात, करभार के सिद्धान्त, सार्वजनिक व्यय के उद्देश्य एवं सिद्धान्त, हीनार्थ प्रबंधन सार्वजनिक ऋण भार एवं शोधन। राजकीय नीति केन्द्र एवं राज्य सरकारों के आय-व्यय स्रोत। परंपरावादी एवं कीन्स का रोजगार सिद्धान्त, आर्थिक प्रणालियां पूजीवाद, समाजवाद एवं मिश्रित अर्थव्यवस्था |

No.-7. भारतीय अर्थव्यवस्था एवं आर्थिक विकास-भारतीय अर्थव्यवस्था की विशेषताएं, गरीबी एवं विकास जनसंख्या प्रवृत्ति एवं जनसंख्या, नीति, राष्ट्रीय आय का वितरण एवं संरचना, भूमि सुधार, लघु एवं सीमान्त कृषक, कृषि की समस्‍यायें एवं समाधान, कृषि विपणन, अल्परोजगार की समस्या, दृश्य एवं अदृश्य बेरोजगारी, कारण एवं समाधान ।

No.-8. औद्योगीकरण की समस्‍्यायें-नई औद्योगिक नीति, कुटीर एवं लघु उद्योग की समस्‍यायें, श्रम समस्या, श्रम संघों की भारत में भूमिका, औद्योगिक विवाद ।

No.-9. भारत में विदेशी व्यापार-संरचना एवं आधुनिक प्रवृत्तियाँ। आयात-प्रतिस्थापना आर्थिक विकास एवं आर्थिक प्रगति, आर्थिक विकास की कमी के कारण, पूंजी निर्माण, रोस्टो के आर्थिक विकास के सोपान। आर्थिक विकास के सिद्धान्त, न्यूनतम प्रयास सिद्धान्त, विकास के उपाय, तकनीक के भारत में पंचवर्षीय योजनायें।

(द) नागरिक शास्त्र

No.-1. राजनीतिक सिद्धान्त राजनीति शास्त्र, परिभाषा, प्रकृति, विषय क्षेत्र एवं राज्य परिभाषा निर्माणक तत्व, राज्य की उत्पत्ति के विभिन्‍न सिद्धान्त, राजनीतिक अवधारणायें संप्रभुता, कानून एवं दण्ड के सिद्धान्त, स्वतन्त्रता, समानता अधिकार, नागरिकता, प्रजातन्त्र एवं अधिनायक तनन्‍त्र। राजनीतिकवाद, व्यक्तिवाद, उदारवाद, फासीवाद, एवं वैज्ञानिक समाजवाद।

No.-2. राजनीतिक दार्शनिक-प्लेटो, अरस्तू, हाक्स लाक और रूसों, बेन्थम और जे0ए0 मिलए कार्लमार्क्स, मनु, कौटिल्य और गाँघी।

No.-3. शासन एवं राजनीतिक, भारतीय संदर्भ में संविधान, परिभाषा एवं वर्गीकरण, सरकार के प्रकार, संसदात्मक एवं अध्यात्मक, एकात्मक एवं संघात्मक, संस्कार के अंग व्यवस्थापिका, कार्यपालिका एवं न्यायपालिका, निर्वाचन प्रणाली, चुनाव आयोग, चुनाव सुधार, राजनीति दल एवं मतदान व्यवहार, भारतीय राजनीतिक प्रणाली।

No.-4. गोखले, तिलक, गाँधी, नेहरू, सुभाष, जिन्‍ना, एवं डा0 बी0 आर0 अम्बेडकर का राष्ट्रीय आन्दोलन में योगदान, भारतीय, संविधान, मुख्य विशेषताऐं ,/ मौलिक अधिकार एवं राज्य के नीति निर्देशक तत्व, संघ सरकार राष्ट्रपति मंत्रिपरिषद संसद व सर्वोच्च न्यायालय न्यायिक सक्रियता राज्य सरकार राज्यपाल मुख्यमंत्री केन्द्र, राज्य संबंध, जिला प्रशासन, जिलाधिकारी, लोकतान्त्रिक विकेन्द्रीकरण एवं पंचायती राज, भारतीय लोकततन्त्र की कुस्तारी भारतीय राजनीति में जातिवाद क्षेत्रवाद एवं सांप्रदायिकता, राजनीतिक दल, राष्ट्रीय एकीकरण की समस्या, राजनीतिक दल एवं दबाव समूह भारतीय प्रशासन नौकरशाही अम्बुडसमैन लोकपाल एवं लोकायुक्त भारत एवं संयुक्त राष्ट्र संघ।

No.-5. आलोक-उपरोक्‍त चार विषयों में से प्रत्येक अभ्यर्थी को किन्‍ही दो विषयों के प्रश्नों को हल करना होगा।

UP TGT Syllabus Sanskrit/संस्कूत

No.-1. गद्य, पद्य एवं नाटक-अधोलिखित, ग्रन्थों के निर्धारित अंकों के आधार पर शब्दार्थ, सूक्तिर्यो, शब्दों की व्याकरणात्मक टिप्पणी, चरित्र चित्रण तथा ग्रन्थकर्ता का परिचय कादम्बरी-(शुकनासोपदेश मात्र), शिवराज विजयम्‌, प्रथम निःश्वास), किरातर्जुनीयम्‌ ( प्रथम सर्ग) मेघदूतम्‌ (सम्पूर्ण) नीतिशतकाम्‌ (सम्पूर्ण) अभिज्ञान शाकुन्तलम्‌ (चतुर्थं अंक) ओर उत्तर राम चरितम्‌ (तृतीय अंक)।

No.-2. व्याकरण-डा0 राम बाबू सक्सेना कृत “संस्कृत व्याकरण प्रवेशिका” के आधार पर सन्धि, समास, कारक एवं प्रत्याहार का परिचय, अकारान्त, इकारान्त उकारान्त, ऋकारान्त, पुल्लिंग, स्त्रीलिंग एवं नपुंसक लिंग शब्दों का रूप, सर्व, यत्‌, किम्‌, युष्मद्‌ इदम्‌, अस्मद, अयम्‌ सर्वनामों के रूप एक सेसौ तक की संख्याओं के संस्कृत शब्दों का ज्ञान, भू. गम्‌, पद्‌, पा, लभ्‌, हन्‌, दुह, दा, भी, दिव, जनि, तुद, रथ, प्रच्छ, बू तथा चूर धातुओं के लद्‌, लोट्‌, लृट, लड ओर विधिलिड्‌ में रूप। संस्कृत सुभाषित एवं सूक्तियां का परिज्ञान, वाक्य परिवर्तन ओर अशुद्धि परिमार्जन ।

No.-3. प्रशिक्षणात्मक संस्कृत प्रशिक्षण की दृष्टि से व्याकरण, अनुवाद, पद्य आदि की पाठन विधियो का सामान्य परिवय।

UP TGT Syllabus Urdu/उर्दू

No.-1. उर्दू जबान की मुखतसर तारीख (पैदाइश और तरक्की), दिल्‍ली और लखनऊ के दबिस्तान, उर्दू शाइरी का इर्तिका, उ्दूं अस्नाफे नजम-ओ नस्त्र (नावेल, दास्तान, अफसाना, ड्रामा, गजल, कसीदा, मंसनवी, नज्म मर्सिमा) तरक्की पसन्द तहरीक (इब्तिवा और इर्तिका), मशहूर किताबें-बाग-ओ बहार, फसानए अजाइब, फसानए आजाद, शेरूल, अजम, मुकद्दम-ए–अनीस-ओ-दबीर,

हजारी शाहरी मशहूर मुसन्निफीन और शादूर-मीर अम्मन, रजब अली बेग सुरूर सर सयूयद अबुल कलाम आजाद, मौलाना मुहम्मद हुसैन आजाद, मीर, गालिब, मोबिन, इकबाल, चकबस्त, अकबर इलाहाबादी, फिराक, फैज, कबाइद जमाना (माजी, हाल, मुस्तकाबिल), तजकीर-ओ-तानीस, जमा वाहिद, तशबीह, इस्तेआरा, तजनीस, इस्म, सिफ्त जमीर, फेल, हुस्नेतालीन, तजाद, लफ-ओ-नश्र मुहावरे और कहावतें, जदीद दौर के मशहूर शाइर और अदीब, अख्बारात, रिसाले, अफसानानिगार, नावेलनिगार।

UP TGT Syllabus-Art/चित्रकला

No.-1. भारत के प्रागैतिहासिक कलाकेन्द्र जैसे मिर्जापुर, भीमबैठका, सयगढ़, बाँदा, पंचमढ़ी, होशंगाबाद इत्यादि सिन्धु घाटी, सभ्यता की कला (हड़प्पा और मोहन जोदडों) भारतीय चित्रकला के छः: अंक जोगीमारा अजन्ता, बाघ, बाढ़ामी, एलोरा, सित्तनवासल इत्यादि के विभत्तिचित्र, भारतीय लघु चित्रकला (जैन, पाल, अपक्रंश) राजस्थानी, शैली (बूढ़ी, कोटा, किशनगढ़, जयपुर इत्यादि) मुगल शैली (अकबर, जहांगीर, शाहजहॉ, औरगंजेब)

No.-2. पहाडी शैली (कांगड़ा, बसौली, इत्यादि) बंगालशैली और उसके कलाकर जैसे अवनीन्द्र नाथ ठाकुर, नन्‍द लाल बोस, असित कुमार हल्ढ़ार डी0पी0 राय चौधरी क्षितीन्द्र नाथ मजुमदार इत्यादि, समसामयिक चित्रकला और उसके मुख्य कलाकार, जैसे राजा रवि वर्मा, रवीन्द्र नाथ ठाकुर, गगनेन्द्र नाथ ठाकुर, यामिनी राय, अमृता शेरगिल, एन0एस0बेन्दे, के0 के0 हेब्बर, के एस0 कुलकर्णी, एम0एफ0 हुसैन के0एच0 आरा इत्यादि।

No.-3. कला के तत्व जैसे रेखा , आकार वर्ण तान, पोत अन्तराल, चित्र संयोजन के सिद्धान्त जैसे-सहयोग, सामंजस्य संतुलन, प्रभावितलय अनुपात, परिप्रेक्य और उसका चित्रकला में महत्व।

UP TGT Syllabus-Agriculture/कृषि

No.-1. सस्य विज्ञान का सिद्वान्त-परिभाषा, संकल्पना, विषय क्षेत्र और विकास, फसलों का वर्गीकरण, मिश्रित कृषि, शुष्क कृषि, फसल चक्र क्रमवार कृषि बहु फसल और आंतरिक फसल। कृषि मौसम शास्त्र मौसम और ऋतुशास्य विकास को प्रभावित करने वाले पर्यावरणीय तत्व, मौसम पूर्वानुमान।

No.-2. खाद्यान्न, दाले, तिलहन, रेशेदार फसले, चारा फसले गाठदार एवं जड़वाली फसले और मुद्रादायनी फसलों की उत्पत्ति, इतिहास, वितरण, प्रकार, कृषिगत कार्य की प्रक्रिया ।

No.-3. पशु प्रजनन-प्रजनन का उद्देश्य प्रजनन की विधि, पशुओं की विभिन्‍न प्रजातियां चौपायों के चुनाव की विधि पशुओं के पोषण और स्वास्थ्य देखभाल पोषण और स्वास्थ्य रक्षा।

No.-4. पशुओं की बीमारी-पशुओं के विभिन्‍न रोगों का विवरण, लक्षण निदान और उपचार, दुग्ध उत्पादन और विपणन, दूध का स्वास्थ्यपरक उत्पादन।

No.-5. मृदा विज्ञान मृदा का भौतिक रासायनिक और जैविक गुण खाद्य एवं उर्वरक, पादप के पोषण की आवश्यकता पोषण के स्त्रोत, खाद्य एवं उर्वरकों का वर्गीकरण ।

No.-6. जल-प्रबंधन-विभिन्‍न फसलों के लिए आवश्यक जल के साधन और विधि आर्द्रता संरक्षण सिचाई के साधन और विधियां, अपवाह का सिद्वान्त, अपवाह के लाभ एवं हानियां, अपवाह के प्रकार, कृषि यंत्रों और उपकरणों के प्रकार, विभिन्‍न कृषि में उनकी उपयोगिता, जुताई के लक्ष्य, जुताई की विधियाँ, भूपरिष्करण में प्रयोग होने वाले यंत्र।

No.-7. विभिन्‍न सब्जियों में फलों का उत्पादन-सब्जी एवं फलों के खेती के लिए पौधशाला प्रबन्धन, सब्जी और फलों के संरक्षण और प्रक्रिया।

No.-8. खनिज एवं जल के शोषण की प्रारम्भिक विचार-पत्तियों के कार्य-वाष्पोत्सर्जन स्वसन, कार्बनीकरण, अच्छे बीजों के मूल्य और गुण बीजों के प्रकार, बीज गुड़न करने के सिद्वान्त जांच और प्रभावीकरण, विभिन्‍न प्रकारों के बीजों की अलग-अलग फसलचक्र में उपयोगिता।

No.-9. कीट विज्ञान-प्रमुख कृमि एवं कीट का ज्ञान और प्रमुख फसलों की बीमारियों और उनकी रोकथाम ग्रामीण मौलिक संस्थाओं के भूमिका एवं लक्ष्य भारत में ग्रामीण विकास के लिए चलाये गये विभिन्‍न कार्यक्रम।

No.-10. खेती और किसानों से संबंधित राज्य संस्थान, विभिन्‍न ग्रामीण परियोजनाये एवं अभिलेखों का ज्ञान, मानचित्र, खसरा, खतौनी।

UP TGT Syllabus-Biology/जीव विज्ञान

(अ) जन्तु विज्ञान

No.-1. विभिन्‍न संघों के निम्नलिखित प्रतिनिधियों का वर्गीकरण, स्वभाव, संरचना तथा जीवन चक्र प्रोटोजोआ-एन्टी अमीबा, प्लाज्मोडियम, पैरामीसियम, युग्लिना, प्रोटोजोआ तथा उनके द्वारा उत्पन्न रोग, पोरीफेरा ल्युकोसोलिनिया, साइकॉन सीलेन्ट्रेटा हाइड्रा, कओबिलिया, आरिलिया, हेल्मिन्थ फेशियोला, टीनिया, ऐस्केरिस, हेल्मिन्थ तथा उनके द्वारा उत्पन्न रोग, एनिलिडा, नीरिस, फेरिटिमा, जोक, आथेपोडा, तेल चट्टा, मस्का, मच्छर, झीगा, कीटों का आर्थिक महत्व मोलस्का-यूनियनों पाइला, इकाइनोडरमेटा-सितार्रा मछली, कोर्डोटा, प्रोटोकार्डेटा हर्डमानिया, एम्फियाँयाक्सस, वटेबेटा, मतस्य स्कोलियोडॉन ऐम्फिबिया-राना, रेप्टिलिया-ययूरोमेस्टिक्स अथवा कोई अन्य, छिपकली, एवीज, कोलम्बा, गैमेलिया-खरहा।

No.-2. कोशिका विज्ञान-कोशिका की सूक्ष्म संरचना, सूत्री व अर्थसूत्री विभाजन, युग्मक-जनन, आनुवंशिकी-मेण्डल वाद, सहलग्नता व जीन विनियम, सुजनिकी, जैव विकास, विकास के प्रमाण, विकास के सिद्धान्तलेमार्कवाद, नव-लेमार्कवाद, हार्विनवाद, नव-डार्विनवाद, विकास का सयोगात्मक सिद्धान्त-विकास की क्रिया विधि-उत्परिवर्तन, विभिन्‍नता, पार्थक्य, युगों के अन्तर्गत विकास, मानव का विकास, पारिस्थितिकी, पारिस्थिति तन्त्र की मूल धारणा मुख्य पारिस्थितिक प्रखण्ड, प्रदूषण का सामान्य ज्ञान, शरीर क्रिया विज्ञान व जेव रसायन पाचन क्रिया, श्वसन, क्रिया, परिसंचरण व रूधिर उत्सर्जन तंत्रिकीय संचारण तथा अन्तःवासी तन्त्र का प्रारम्भिक ज्ञान।

No.-3. कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, वसा, एन्‍जाइम तथा हार्मों के गुणों व वर्गीकरण संबंधी प्रारम्भिक ज्ञान, भ्रण विज्ञान, एफियॉक्सस, मेढ़क तथा कुक्कट के परिवर्धन की रूप रेखा, स्तनियों के अप्ररा, प्राणि भूगोल-मुख्य प्राणि भौगोलिक परिमण्डल तथा उनके निवासी प्राणी।

(ब) बनस्पति शास्त्र

No.-1. विषाणु-परिभाषा, प्रकृति, पारगमन, लक्षण तथा महत्व, जीवाणु रूप एवं संरचना, प्रजनन तथा आर्थिक महत्व, लाइकेन और समन्वय तथा आर्थिक महत्व, शैवाल-शैवालों का वर्गीकरण, मुख्य सूहों के विशिष्ट लक्षण जैसे नीरू हरित शैवाल, एवं झूरी शैवाल, नास्टाक कक्‍्लैमाड़, डोमोनस, वॉलवाक्स, यूलोथिक्स स्पाइरोगादूरा, उड़ागोनियम, इक्टोकार्पस बैट्रेकों स्पैम, की प्रकृति संरचना तथा जीवन चक्र शैवाल का आर्थिक महत्व, एलैक्सोपोलस म्यूकर, राइजोपस कवकों का वर्गीकरण, मुख्य समूहों के विशिष्ट लक्षण, पीथियम, एलब्यूगों सैक्रोमाइसीज, पेन्टिसीलियम, पक्‍्सीनियम, एगैरिकस, की प्रकृति, संरचना, प्राप्ति तथा जीवन चक्र कवक का आर्थिक महत्व।

No.-2. बायोफाइटा वर्गीकरण, मुख्य समूहों के लक्षण। रिक्तियाँ, पार्कोन्सियम तथा फ्यूनेरिया की प्राप्ति और जीवन चक्र।

No.-3. टैरिडोफाइटा-वर्गीकरण, मुख्य सूहों के लक्षण। लाइकोपोडियम, से लौजेनेहा, इकक्‍्वीसीटम तथा मारसीलिया की प्राप्ति संरचना व जीवन चक्र, अनावृतबीजी-वर्गीकरण, मुख्य समूहों के लक्षण, साइकस तथा पाइनस की प्राप्ति

No.-4. संरचना, जीवनचक्र और आर्थिक महत्व। जीवाश्मिकी भू वैज्ञानिक समय सारिणी, जीवाष्मों के प्रकार तथा जीवाष्मीकरण, जीवाश्मीकी महत्व ।

No.-5. वार्णिकी- आवृतबीजियों का बेन्थम-हूकर का वर्गीकरण। रैननकुलेसी, क्रूसीफेरी पापावरेसी, कैरियोफिल्लेसी, लैग्यूमिनोसी, रोजेसी, सोलेनसी, कुकरबिरेगी, अम्बेलिफेरी, कम्पोजिटी, सोलमेसी, एकैन्थेसी, लैबिएटी, यूफोरबिएगी विलिऐसी तथा ग्रैमिली का क्रमबद्ध अध्ययन |

No.-6. आर्थिक वनस्पति विज्ञान- इमारती लकड़ी रेसे, तेल, औषधिया, पेय तथा मसाले देने वाले पौधो का ज्ञान। अकारिकी तथा शरीर-जड़, तना, पत्ती तथा पुष्प के विशिष्ट लक्षण और रूप पुष्पक्रम, ऊतक तथा उतक यंत्र, तना तथा पत्ती के शारीरिक लक्षण आर्किडफाइकम तथा टिनोस्पोरा में जड़ और ड्रेसीना, अपरेन्थस, बोरहा विया, तथा निकटटैन्थिस के तनों के विशेष संदर्भ में सामान्य तथा असंगत द्वितीयक बृद्रि।

No.-7. भ्रौणिकी- लघुजीवाणी जनन, गुरू बीजाणु जनन, बीजाण्ड भ्रूणकोष तथा भश्रूणकोष के विशेष संदर्भ में आवृत बीजियों का जीवनचक्र। पारिस्थितिकी और पर्यावरण स्वपारिस्थितिकी, पादप समुदाय, परितंत्र, पादप क्रमण और अनुकूलन। पर्यावरण तथा उसके मुख्य घटक और उनका मानव पर प्रभाव।

No.-8. कोशिका विज्ञान- आनुवंशिकी तथा विकास, पादप कोशिका, कोशिका भिति, कोशिका कला, कोशिकांग तथा कोशिका विभाजन का प्रारम्भिक ज्ञान और इनका महत्व गुणसूत्र संरचना तथा रसायन, मण्डलवाद, सहलगनता और जीन विनियम, लिंग निर्धारण, उत्परिर्वन, तथा बहुगुणिता, विकास के सिद्धान्त।

No.-9. शरीर क्रिया विज्ञान- जल अवाशोषण, रसारोहण, वाष्पोत्सर्जन, अनिवार्य तत्व, हास, लक्षण, प्रकाश संश्लेषण, श्वसन कार्बनिक विलेयों का स्थानान्तरण, प्रोटीन संश्लेषण, नाइट्रोजन चक्र, वृद्धि पदार्थ तथा संचालन। मृदा विज्ञान, मृदा रचना तथा मृदा प्रकार, मृदा अपरदन।

UP TGT Syllabus-Commerce/वाणिज्य

No.-1. एकाउण्ट्स संख्यिकी एवं अकेक्षण-एकाउण्ट्स-पुस्तपालन का अर्थ उद्देश्य एवं विधियाँ, दोहरा लेखा प्रणाली, रोजनामचा, खाताबही तथा तलपट, समायोजन प्रविष्टियों के साथ अन्तिम लेखे तैयार करना, साझेदारी, खाते कम्पनी लेखे, अंशों का निर्गमन एवं हरण।

No.-2. और व्यापारिक संस्थाओं के लेखे अधिकार शुल्क, लेखे किराया-क्रय तथा प्रभाग क्रय संबधी लेखे सांख्यिकीय माध्य संगणियकी का अर्थ क्षेत्र, महत्व एवं सीमायें आकणों का संग्रह वर्गीकरण एवं सारणीयन सारिणयकीय अपकिरण, अंकेक्षण परिभाषा उद्देश्य, महत्व, प्रमाणन का अर्थ, महत्व, प्रमाणन के प्रकार प्रारम्भिक लेखे की पुस्तकों का प्रमाणन।

No.-3. व्यापारिक संगठन एवं प्रबंध व्यापारिक संगठन व्यापार एवं सभ्यता का संबंध, व्यवसायिक संगठन का अर्थ एवं क्षेत्र, पर्यावरण प्रदूषण तथा उद्योग धन्धे, व्यापारिक कार्यालय के कार्य, व्यावसायिक संगठन के स्वरूप, विज्ञापन एवं विक्रय, कला देशी व्यापार एवं विदेशी व्यापार, प्रबन्ध-प्रबन्ध की प्रकृति एवं महत्व, प्रबन्ध की विभिन्‍न विचारधारायें प्रबन्धकीय कार्य, नियोजन, स्टाफिंग अभिप्रेरणा, समन्वय एवं नियंत्रण।

No.-4. अर्थशात्त्र, मुद्रा, बैंकिंग एवं भारतीय अर्थ व्यवस्था–अर्थशास्त्र की परिभाषा एवं क्षेत्र उपभोग सीमान्त एवं कुल उपयोगिता, सीमान्त उपयोगिता द्वारा नियम, मांग तथा मांग की लोच उत्पादन के साधन, उत्पत्ति के नियम, जनसंख्या के सिद्वान्त, विनिमय-बाजार के प्रकार, पूर्ण प्रतियोगिता एवं एकधिकार के अन्तर्गत मूल्य निर्धारण।

No.-5. वितरण वितरण के सिद्वान्त सीमान्त उत्पादकता रिद्वान्त, मुद्रा की परिभाषा, क्षेत्र एवं कार्य, पूंजीवाद एवं समाजवादी अर्थ व्यवस्था में मुद्रा का महत्व ग्रेशम का नियम मुद्रा का परिणाम सिद्धान्त, मुद्रा के मूल्य में परिर्वतन, बैकिंग के कार्य एवं प्रकार, वाणिज्यिक बैंक के सिद्धान्त रिजर्व बैंक आफ इण्डिया का कार्य, भारतीय अर्थव्यवस्था, भारतीय अर्थव्यवस्था की विशेषतायें जनसंख्या की समस्या, कृषि की समस्या, विदेशी व्यापार संबंधी समस्या।

UP TGT Syllabus-Home Science/गृह विज्ञान

No.-1. आहार एवं पौष्टिकता-पौष्टिकता की संकलपना, आहार की संरचना, एवं कार्य, संस्तुलित आहार, आहार वर्ग का वर्गीकरण और उनका स्रोत, पौष्टिकता, अल्पता के रोग, आहार तैयार करना, खाद्य संरक्षण एवं मिलावट, विभिन्‍न रोगों जैसे-ज्वर, टाइफाइड, अल्सर, मधुमेह, गुर्दा, एवं दिल रोग के रोगियों के लिए आहार।

No.-2. मानव शरीर की संरचना, भोजन का पालन, अवशोषण और चयापचय, सामान्य रसायन। गृह प्रबंधन-गृह प्रबंधन का अर्थ एवं परिभाषा, परिवार संसाधन, परिवार बजट समय, ऊर्जा, एवं धन का प्रबन्धन, निर्णय लेना, लक्ष्य मूल्य और प्रतिमान, पारिवारिक आवश्यकता, कार्य सरलीकरण बचत, और आन्तरिक एवं वाहय सज्जा, गृह एवं पारिवारिक यंत्र ।

No.-3. स्वास्थ्य-स्वास्थ्य का अर्थ एवं परिभाषा, व्यक्ति का स्वास्थ्य एवं स्वच्छता, स्वास्थ्य के क्षेत्र में कार्यरत सरकारी और गैर सरकारी संगठन, स्वास्थ्य के लिए पर्यावरण का महत्व, पर्यावरण प्रदूषण, स्वास्थ्य प्रकोप के रूप में जल एवं वायु जनित रोग, प्राथमिक स्वास्थ्य रक्षा के सिद्वान्त, पारिवारिक सामान्य दुर्घटनाएं उनका निदान विभिन्‍न प्रकार के पद््‌टियों का उपयोग।

No.-4. बाल विकास-बच्चों की वृद्धि एवं विकास, बच्चों की मृत्यु एवं रूग्णता, विद्यालयीय स्वास्थ्य, विवाह एवं परिवार।

No.-5. वस्त्र एवं सिले कपड़े वस्त्र, रेशें का वर्गीकरण और उसका रसायन, परिधान की बनावट एवं उसकी सजावट, कपड़ों की रंगाई एवं धुलाई विभिन्‍न अवसरों और विभिन्‍न मौसमों में लिवाश का चुनाव उसका निर्माण।

No.-6. प्रसार शिक्षा-गूह विज्ञान का अर्थ, परिभाषा, इतिहास, विषयक्षेत्र गृह विज्ञान के विविध शाखाओं और उनका अर्न्‍तसम्‍बन्‍ध, प्रसार शिक्षक की आवश्यकता, विषय क्षेत्र एवं दर्शन प्रसार के विभिन्‍न विधियाँ, सामुदायिक विकास |

UP TGT Syllabus-Physical Education/शारीरिक शिक्षा

No.-1. शारीरिक शिक्षा के सिद्वान्त एवं शिक्षा मनोविज्ञान-परिभाषा, उद्देश्य, लक्ष्य, शारीरिक जैविक आधार वंशानुक्रम एवं वातावरण गुण पुरूष एवं महिला में अन्तर सेल्डन और कस्नर द्वारा वर्गीकरण, सामाजिक आधार-परिवार समुदाय, विद्यालय व्यक्तिगत अंतर, प्रेरणा सीखने का सिद्धान्त सीखने एवं सीखना स्थानान्तरित करने का नियम, शारीरिक शिक्षा के विशेष संदर्भ में।

No.-2. शारीरिक शिक्षा के संगठन विधि एवं पर्यवेक्षण संगठन का अर्थ और प्रशासन शारीरिक शिक्षा के महत्व एवं निर्देशन सिद्धान्त शारीरिक शिक्षा की सुविधों और उनका स्तर-खेल मैदान व्यायामशाला, यत्र कर्मचारी और नेतृत्व समयसारणी का निमार्ण वित्त एवं बजट, विधि के अर्थ एवं महत्व तथा प्रभावित करने वाले तत्व पाठ्य निर्माण प्रतियोगिता और खेल कूद समारोह-लीग नाट, आउट इटयूरल तथा इक्ट्रामूरल दिवस ।

No.-3. कोचिंग के सिद्धान्त-खेल कूद मैदान के इतिहास एवं विकास फूटवाल हाकी, बालीबाल, बास्केटबाल, कबड्डी, खो-खो दौड़ कूद के खेल मैदान का आकार एवं चिन्हित करना, अस्तरीय उपकरण नियम एवं नियमों का विवेचन इन खेलों के अधिकारियों का कर्तव्य कोच का व्यक्तिगत गुण योग्यता।

No.-4. शरीर संरचना का व्यायाम-शरीर के रचना की व्यवस्था, शरीर में मांसपेशियों के प्रकार एवं अन्तर, रक्‍त संचरण एवं शोषण तन्‍त्र पाचन तन्‍त्र और विशेष सम्बेदन अंग, त्वचा, आँख और कान, व्यायाम का रक्त संचार और स्वशन तन्‍त्र पर प्रभाव मांसपेशियों में परिवर्तन एवं सिकुडन।

No.-5. खिलाड़ियों के चोट की देख-रेख एवं स्वास्थ्य शिक्षा शारीरिक शिक्षा में कैनसियोलोजी की भूमिका और परिभाषा, शरीर एवं जोडा की रचना एवं प्रकार, शरीर की मूल भूत गतियाँ, खिलाडियों के सामान्य चोट, जल-निदान, विद्युत-निदान, स्वास्थ्य एवं प्रभावित करने वाले तत्व, सामान्य संक्रमण रोग, व्यक्तिगत स्वच्छता, सार्वजनिक स्वास्थ्य, प्रशासन विद्यालय स्वास्थ्य कार्यक्रम एवं उसकी समस्या संतुलित आहार।

No.-6. मनोरंजन के लिए कैम्प लगाना-मनोरंजन की परिभाषा, विषय क्षेत्र एवं महत्व, योजना, नियोजन, नेतृत्व, कैम्प के प्रकार कैम्प की स्थिति कार्यक्रम एवं मूल्यांकन भारत में स्वतन्त्रता के पूर्व एवं पश्चात्‌ शारीरिक शिक्षा में शिक्षकों के प्रशिक्षणों हेतु संस्थान, खेलकूद पुरस्कार।

UP TGT Syllabus वस्त्र कटाई एवं सिलाई

No.-1. मौलिक टाके-टाके, सिलाइयाँ, डार्ट, प्लीट, टक्‍स सजावटी टाके आस्तीन, पाकेट, कालर, कफ, प्लेट, वेल्ट वटल होल, पेंबन्द आदि, नाप-विभिन्‍न नाप लेने की पद्नतियां, सावधानियाँ आदि पेटर्न-पैटर्न के प्रकार, सामग्री ड्राफ्ट करने काटने, विछाने व रखने योग्य की सावधानियां, ट्रीमिंग-प्रकार व उपयोग, सिलाई-सिलाई का भवतव्य (भविष्य), वस्त्र का महत्व, सिलाई व्यवसाय का महत्व, सिलाई कटाई डिजाइजिंग में अन्तर, सिलाई मशीन विभिन्‍न प्रकार की मशीने, उनके पुर्जे, उनका उपयोग दोष व उपचार, मशीन अटैच मेन्टस।

No.-2. परिभाषिक शब्द-सिलाई व्यवसाय में आने वाले शब्दों की वयख्या, औजार-सिलाई, नापने काटने, प्रेस करने, ड्राफ्टिंग, चिन्ह लगाने के औजार व उपकरण, मानव आकृतियॉँ-विभिन्‍न मानव आकृतियाॉ, व वस्त्रों को काटने, बनाने में उनका प्रभाव, अष्ट मस्तकीय सिद्धान्त-ऐट हेड थ्योरी, जोड व माशपेशियाँ व उनका प्रभाव, बढ़ोत्तरी के सिद्वान्त, प्रेसिंग-विभिन्‍न पद्धतियां सावधानियां, उपयोगिता, आयरनिंग व प्रेसिंग में अन्तर कपड़ा-विभिन्‍न कपड़े पहिचान, चुनाव वर्गीकरण, श्रीकेज, परीक्षण फिटिंग व फिन्सिग-ट्रायल, दर्जियों के चिन्ह वस्त्र की विशेषता, डिजाइन स्टाइल व फैशन में अन्तर डिजाइन-तत्व, रेखा कला व वस्त्र का सम्बंध, डिजाइन के सिद्धान्त विक्रय-विक्रेता के गुण, विभिन्‍न ग्राहको से व्यवहार, वस्त्र कीमत निकालना, दुकान प्रबन्धन।

UP TGT Syllabus Sangeet/संगीत

(अ) गायन

No.-1. निम्न तकनीकी शब्दों की परिभाषा एवं व्याख्या संगीत, स्वर, सप्तक, शुद्र और विकृत स्वर, अलंकार, आलाप, विवादी, पकड़, राग, जाति, ओडव, सम्पूर्ण। ताल, मात्रा, लय तथा रोगों का परिचय, संगीत का इतिहास, विविध रोगों का अध्ध्यन विशेषता स्वर विस्तार एवं अलंकारों के माध्यम से रागों की बढ़त।

No.-2. रागों के आलाप, ताल, सहित लिपिबद्द करने की योग्यता। तालों का परिचय, गीतों के अलाप, तान सहित लिखना। स्वर समूह के छोटे-छोटे टुकड़ों के आधार पर राग पहिचानने की योग्यता |

No.-3. अमीर खुसरों तथा भारत खण्डे की जीवनी, राग चमन और खमाज का विस्तृत अध्ययन, प्रत्येक में एक-एक गीत आना चाहिए। विलावल, भूपाली, आसावरी रागों का परिचय। प्रत्येक का गीत स्वर लिपि सहित लिखना। प्रत्येक राग का सरगम और गीत। प्रत्येक राग का आरोह’अवरोह, पकड़ गाना।

No.-4. श्रुति, स्वर, ग्राम मूर्च्छना, सारणी चतुष्टमी का अध्ययन, भारतीय संगीत का उद्भव एवं विकास, क्रम धुवद, ख्याल, टप्पा, ढुमरी, तराना, का अध्ययन, प्रमुख कलाकारों की जीवनी, त्यागराज, तानसेन, बालकृष्ण इचल, करन्जिकर, पं0 बिष्णु दिगम्बर पुलकर, पं० ओंकारनाथ ठाकुर पं0 बलवंतराज जी भट्ट, आरोह, अवरोह अपतत्व, बहुत्व, शुद्र कल्याण, दरबारी कान्हड़ा, अड़ाना, तोडी, मुल्तानी, मियालल्हार रागों का अध्ययन, ध्रुपद, धमार, तराना, टप्पा का उदाहरण सहित अध्ययन, लयकारी, दुगुल, तिगुल, तिगुन, चौगुन, आड़ा चारताल, झूमर एम, ताल, पंचमस्वरी, गंज झम्पा, रूपक का अध्ययन।

(ब) वादन संगीत स्वर (शुद्द एवं विकृत)

No.-1. अलाप, थाट, राग, आरोह, अवरोह, वादी संवादी पकड़, गत, टोडा, जमजमा, मात्रा, लय भरी, ठेका, समताल की परिभाएँ एवं व्यवस्था, संगीत का इतिहस एवं रोगों का अध्ययन वादन, पाठ्यक्रमों के रागों की विशेषताएं, रागों की गायकी का शास्त्रीय अध्ययन स्वर विस्तार एवं अलंकारों के माध्यम से राग की बढ़ता, तालों के टुकड़े, परन आदि लिखना, सरल स्वर विस्तार एवं तोड़ों के साथ गत के लिपिबद्ध करके लिखना। स्वर समूह के छोटे-छोटे टुकड़ों के आधार पर रागों की पहचान, ठेके के कुछ बोलों के आधार पर तालों को पहचानने की योग्यता।

No.-2. तबला, पखावत या मृदंग, वीणा सितार, सरोद, सारंगी, इसराज या दिलरूबा, गिटार, वायलिन और बॉँसुरी वाद्ययन्त्र। पारिभाषित व्याख्या-आलाप जोड़, अलाप, जमजमा, गमक, जवारी, तरप। वाद्य वर्गीकरण के प्रकार का सामान्य ज्ञान, मिजराब का कार्य मिजराब द्वाराकृत विभिन्‍न लयात्मक प्रसार, विस्तार वाद्य का उद्भव एवं विकास का क्रमिक विवेचन/विणा के प्रकार का संक्षिप्त ज्ञान तन्त्रवाद्य के सुगम संगीत, धुन की उपयोगिता।

No.-3. जीवनियां पं0 रविशंकर, इनायम खाँ, पं० बलराम पाठक, उस्ताद मुस्ताद अली। वाद्य संबधी तकनीकी, कौशल एवं वादन शैलियां।

No.-4. गीतों को स्वरलिपि में लिखना। लय. और लय के प्रकार, ताल ताली, ठेका, सुम खाली, आवर्तन, विभाग, पेशकारा, गत कायदा बूला गत, टुकड़ा, परन परन के प्रकार, दमदार तिहाई, बेदमदार तिहाई, तबला, पखावज के वर्ण प्रारम्भिक बोल निकालने के तरीके।

No.-5. वाद्य का ऐतिहासिक विवरण, वाद्य के अंग (विवरण सहित) मिलाने की विधि। विभिन्‍न बोलों का ताललिपि में लिखने का ज्ञान, तालों का विशद अध्ययन-जीवनियां प0 भैरव सहाय, नाना साहब पान्से, पं० कण्ठे महराज, उस्ताद अल्लारखा खॉँ। नोट-गायन एवं वादन दोनों के बराबर संख्याओं में प्रश्न होंगे।