Anupras alankar / अनुप्रास अलंकार – परिभाषा, भेद एवं उदाहरण

अनुप्रास अलंकार : अनुप्रास शब्द दो शब्दों से मिलकर बना है – अनु + प्रास। यहाँ पर अनु का अर्थ है- बार -बार और प्रास का अर्थ होता है – वर्ण। जब किसी वर्ण की बार – बार आवर्ती हो तब जो चमत्कार होता है उसे अनुप्रास अलंकार कहते है। यह अलंकार शब्दालंकार के 6 भेदों में से एक हैं। Today we share about  अनुप्रास अलंकार की परिभाषा उदाहरण सहित लिखिए, अनुप्रास अलंकार के 10 उदाहरण, अनुप्रास अलंकार के 5 उदाहरण, अनुप्रास की परिभाषा, अनुप्रास अलंकार के 20 उदाहरण, अनुप्रास अलंकार की कविता, अनुप्रास अलंकार के उदाहरण संस्कृत में

अनुप्रास अलंकार की परिभाषा

No.-1. अनुप्रास अलंकार में किसी एक व्यंजन वर्ण की आवृत्ति होती है। आवृत्ति का अर्थ है दुहराना जैसे– ‘तरनि-तनूजा तट तमाल तरूवर बहु छाये।” उपर्युक्त उदाहरणों में ‘त’ वर्ण की लगातार आवृत्ति है, इस कारण से इसमें अनुप्रास अलंकार है।

अनुप्रास अलंकार का उदाहरण

No.-1. जन रंजन मंजन दनुज मनुज रूप सुर भूप।

No.-2. विश्व बदर इव धृत उदर जोवत सोवत सूप।।

अनुप्रास अलंकार के अन्य उदाहरण

No.-1. उदाहरण

लाली मेरे लाल की जित देखौं तित लाल।

No.-2. उदाहरण

विमलवाणी ने वीणा ली कमल कोमल कर में सप्रीत।

No.-3. उदाहरण

प्रतिभट कटक कटीले केते काटि-काटि कालिका-सी किलकि कलेऊ देत काल को।

No.-4. उदाहरण

सेस महेस दिनेस सुरेसहु जाहि निरंतर गावै।

No.-5. उदाहरण

बंदऊँ गुरुपद पदुम परागा।

सुरुचि सुवास सरस अनुरागा।

No.-6. उदाहरण

मुदित महीपति मंदिर आए।

सेवक सचिव सुमंत बुलाए।

No.-7. उदाहरण

चारु चंद्र की चंचल किरणें, खेल रही हैं जल-थल में।

No.-8. उदाहरण

प्रसाद के काव्य-कानन की काकली कहकहे लगाती नजर आती है।

No.-9. उदाहरण

लाली देखन मैं गई मैं भी हो गई लाल।।

No.-10. उदाहरण

संसार की समर स्थली में धीरता धारण करो।

No.-11. उदाहरण

No.-1. जे न मित्र दुख होहिं दुखारी, तिन्हहि विलोकत पातक भारी।

No.-2. निज दुख गिरि सम रज करि जाना, मित्रक दुख रज मेरु समाना।।

अनुप्रासालंकारः (संस्कृत)

No.-1. वर्णसाम्यमनुप्रासः । स्वरवैसादृश्येऽपिव्यंजनदृशत्वं वर्णसाम्यम् । रसायनुगतः प्रकृष्टो न्यासोऽनुप्रासः । इस अलंकार में किसी व्यंजन वर्ण की आवृत्ति होती है। ‘आवृत्ति का मतलब है—दुहराना । अर्थात् जब किसी वाक्य में कोई खास व्यंजन वर्ण या पद अथवा वाक्यांश लगातार आकर उसके सौंदर्य को बढ़ा दे, तब वहाँ ‘अनुप्रास अलंकार’ होता है।

उदाहरणस्वरूपः

No.-1.

No.-1. ततोऽरुणपरिस्पन्दमन्दीकृतवपुः शशी ।

No.-2. दधे कामपरिक्षामकामिनीगण्डपाण्डुताम् ।। ।

No.-2.

No.-1. अपसारय घनसारं कुरु हारं दूर एवं किं कमलैः ।

No.-2. अलमलमानि! मृणालैरिति वदति दिवानिशंबात्य ।।

No.-3.

No.-1. यस्य न सविधै दयिता दवदहनस्तुहिनदीधितिस्तस्य।

No.-2. यस्य च सविधे दयिता दवदहनस्तुहिनदीधितिस्तस्य ।।

अनुप्रास अलंकार के भेद

No.-1. छेकानुप्रास अलंकार

No.-2. वृत्यानुप्रास अलंकार

No.-3. लाटानुप्रास अलंकार

No.-4. अन्त्यानुप्रास अलंकार

No.-5. श्रुत्यानुप्रास अलंकार